इंट्राडे ट्रेडिंग की मूल बातें
भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ वर्षों में इंट्राडे ट्रेडिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आसान इंटरनेट एक्सेस ने इसे हर किसी के लिए सुलभ बना दिया है। नए ट्रेडर्स भी इसे सीखना चाहते हैं क्योंकि यह क्विक प्रॉफिट का लालच देती है, लेकिन साथ ही इसमें उच्च जोखिम भी छिपा है।
इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है? (What is Intraday Trading in Hindi)
सरल शब्दों में, यह एक ऐसी ट्रेडिंग स्टाइल है जिसमें आप एक ही दिन में शेयर्स को खरीदते और बेचते हैं, बाजार बंद होने से पहले। इस आर्टिकल में आप सीखेंगे: इंट्राडे ट्रेडिंग की पूरी मैकेनिक्स, इसके प्रकार, डिलीवरी ट्रेडिंग से अंतर, कितने पैसे से शुरुआत करें, बेस्ट इंडिकेटर्स, प्रोफिटेबल स्ट्रेटेजीज, और टैक्स नियम।
इंट्राडे ट्रेडिंग, जिसे डे ट्रेडिंग भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आप स्टॉक्स या अन्य फाइनेंशियल इंस्ट्रुमेंट्स को एक ही ट्रेडिंग डे के भीतर खरीदते और बेचते हैं
इसका मतलब यह हुआ कि आपको अपनी पोजीशन को बाजार बंद होने से पहले जरूर बंद (square off) करना होता है, चाहे लाभ हो या हानि।
Same day buy and sell concept: मान लीजिए आपने रिलायंस के 100 शेयर्स सुबह 10:00 बजे ₹2,500 प्रति शेयर की दर से खरीदे। दोपहर 1:30 बजे शेयर का भाव ₹2,530 हो गया। आपने सभी शेयर्स बेच दिए। इसका मतलब आपने ₹30 प्रति शेयर का लाभ कमाया, यानी कुल ₹3,000 का प्रॉफिट एक ही दिन में।
लेकिन अगर शेयर का भाव गिरता है, तो भी आपको उसी दिन पोजीशन बंद करनी होगी।
डिलीवरी ट्रेडिंग और इंट्राडे ट्रेडिंग में अंतर:
डिलीवरी ट्रेडिंग में आप शेयर्स को लंबे समय के लिए होल्ड करते हैं, जबकि इंट्राडे में सिर्फ एक दिन। डिलीवरी में शेयर्स का मालिकाना हक आपके डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है, जबकि इंट्राडे में कोई डिलीवरी नहीं होती। इंट्राडे में आप 5x से 20x तक का लीवरेज इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि डिलीवरी में पूरा कैपिटल चाहिए होता है।
इंट्राडे ट्रेडिंग कैसे काम करती है?
भारतीय स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग का समय सुबह 9:15 AM से 3:30 PM तक होता है। इस दौरान आप किसी भी स्टॉक को खरीद या बेच सकते हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग में आपको MIS (Margin Intraday Square-off) प्रोडक्ट टाइप चुनना होता है, जिससे ब्रोकर को पता चलता है कि यह इंट्राडे ऑर्डर है।
इंट्राडे ट्रेडिंग में आप दो तरीके से कमा सकते हैं:
बाय लो, सेल हाई: सस्ते में खरीदें, महंगे में बेचें
शॉर्ट सेलिंग: पहले महंगे में बेचें, फिर सस्ते में खरीदें
शॉर्ट सेलिंग का मतलब है कि आपके पास शेयर नहीं है, फिर भी आप उसे बेचते हैं, भविष्य में उसे कम भाव पर वापस खरीदने की उम्मीद में।
उदाहरण: अगर आपको लगता है कि कंपनी X का शेयर ₹500 से ₹480 तक गिरेगा, तो आप ₹500 पर शॉर्ट सेल कर सकते हैं और ₹480 पर वापस खरीदकर ₹20 प्रति शेयर का लाभ कमा सकते हैं।
मार्केट आवर्स में ट्रेड क्यों जरूरी है?
इंट्राडे ट्रेडिंग में समय सबसे महत्वपूर्ण है। आपको अपनी सभी पोजीशन्स को 3:15 PM से 3:20 PM के बीच बंद करना होता है। अगर आप खुद से नहीं बंद करते, तो ब्रोकर का सिस्टम ऑटो स्क्वायर ऑफ कर देता है, जिसके लिए अतिरिक्त चार्जेज लग सकते हैं।
स्क्वायर ऑफ क्या होता है?
स्क्वायर ऑफ का मतलब है कि आपने जो पोजीशन खोली है, उसे बंद कर देना। अगर आपने खरीदा है, तो बेच दें; अगर आपने शॉर्ट किया है, तो वापस खरीद लें। यह प्रोसेस इंट्राडे ट्रेडिंग का कोर कॉन्सेप्ट है।
इंट्राडे ट्रेडिंग के प्रकार (Types of Intraday Trading)
1. इक्विटी इंट्राडे ट्रेडिंग
यह सबसे कॉमन प्रकार है, जिसमें आप सीधे कंपनियों के शेयर्स को ट्रेड करते हैं। उदाहरण: टीसीएस, HDFC Bank, रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े स्टॉक्स। इनमें उच्च लिक्विडिटी और वोलैटिलिटी होती है, जो इंट्राडे के लिए आदर्श है।
2. इंडेक्स में इंट्राडे ट्रेडिंग (Nifty / Bank Nifty)
Nifty 50 और Bank Nifty जैसे इंडेक्स फ्यूचर्स में ट्रेडिंग बहुत लोकप्रिय है। इनमें उच्च लीवरेज मिलता है और मार्केट मूवमेंट तेज होता है। एक लॉट Nifty फ्यूचर्स के लिए आपको लगभग ₹2.5 लाख से ₹3.5 लाख का मार्जिन चाहिए होता है।
F&O में इंट्राडे ट्रेडिंग
इंट्राडे के लिए आप फ्यूचर और ऑप्शंस में trading करके आप कम कैपिटल में बड़े पोजीशन्स ले सकते हैं। ऑप्शंस बायिंग के लिए आप ₹5,000 से ₹10,000 से भी शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन ऑप्शंस सेलिंग के लिए ₹2 लाख से ₹3 लाख तक का मार्जिन चाहिए।
कमोडिटी इंट्राडे ट्रेडिंग
MCX एक्सचेंज पर गोल्ड, सिल्वर, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस आदि में इंट्राडे ट्रेडिंग की जा सकती है। गोल्ड फ्यूचर्स के लिए ₹50,000 से ₹1.5 लाख और क्रूड ऑयल के लिए ₹20,000 से ₹50,000 का मार्जिन लगता है।
करेंसी इंट्राडे ट्रेडिंग
USD/INR, EUR/INR जैसे करेंसी पेयर्स में ट्रेडिंग के लिए कम मार्जिन की जरूरत होती है, लगभग ₹2,000 से ₹5,000 प्रति लॉट।
इंट्राडे बनाम डिलीवरी ट्रेडिंग और कैपिटल मैनेजमेंट
| पॉइंट | इंट्राडे ट्रेडिंग | डिलीवरी |
|---|---|---|
| टाइम होराइजन | एक ही ट्रेडिंग डे में बाय और सेल | कई दिनों से लेकर कई सालों तक होल्डिंग |
| ऑब्जेक्टिव | शॉर्ट-टर्म प्राइस मूवमेंट से क्विक प्रॉफिट | लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और डिविडेंड |
| रिस्क लेवल | उच्च जोखिम, दैनिक वोलैटिलिटी के कारण | तुलनात्मक रूप से कम, लॉन्ग-टर्म ट्रेंड पर फोकस |
| कैपिटल रिक्वायरमेंट | कम कैपिटल में लीवरेज के जरिए बड़ी पोजीशन | पूरा कैपिटल चाहिए, कोई लीवरेज नहीं |
| टाइम इन्वॉल्वमेंट | पूरे दिन स्क्रीन पर नजर रखनी होती है | लिमिटेड मॉनिटरिंग, लॉन्ग-टर्म एनालिसिस |
| सूटेबल फॉर व्होम | एक्टिव ट्रेडर्स, टेक्निकल एनालिसिस में माहिर | पेशेंट इन्वेस्टर्स, लोअर रिस्क टॉलरेंस |
Intraday उन लोगों के लिए है जो market timing जानते हैं, जबकि delivery उन लोगों के लिए जो fundamental analysis पर भरोसा करते हैं।
रिस्क कम्पेरिजन: इंट्राडे ट्रेडिंग में रिस्क ज्यादा होता है क्योंकि कीमतें तेजी से बदलती हैं। डिलीवरी ट्रेडिंग में आप लंबे समय तक होल्ड कर सकते हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी का असर कम होता है।
कैपिटल रिक्वायरमेंट: इंट्राडे में ब्रोकर 5x से 10x तक का लीवरेज देते हैं, जबकि डिलीवरी में आपको पूरे पैसे चुकाने होते हैं।
समय: इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए आपको पूरे दिन मार्केट को मॉनिटर करना होता है, जबकि डिलीवरी ट्रेडिंग में साप्ताहिक या मासिक एनालिसिस काफी होती है।
इंट्राडे ट्रेडिंग में कितने पैसे से शुरुआत करें?
इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए मिनिमम कैपिटल
भारत में इंट्राडे ट्रेडिंग शुरू करने के लिए कोई फिक्स्ड मिनिमम राशि नहीं है। लेकिन अधिकांश ब्रोकर कम से कम ₹5,000 से ₹10,000 की शुरुआत की अनुमति देते हैं। हालांकि, मीनिंगफुल रिटर्न के लिए अधिक कैपिटल की जरूरत होती है।
बिगिनर्स के लिए रेकमेंडेड कैपिटल
- ₹20000 से ₹50000 तक — इससे आप 5-10 शेयरों में diversify कर सकते हैं।
- Margin Leverage: Brokers 4x-10x leverage देते हैं, यानी ₹20000 से आप ₹1-2 लाख के ट्रेड कर सकते हैं।
Overtrading से बचें
छोटे capital से overtrading होती है, जिससे losses बढ़ते हैं। हमेशा 1-2% capital per trade का risk लें।
Capital Management Basics
Position Sizing: कुल capital का 5-10% ही एक trade में लगाएं।
Daily Loss Limit: दिन में 2% loss पर trading बंद कर दें।
Intraday Trading के फायदे (Advantages)
- Quick Profit Opportunity: छोटे price movements (1-3%) से भी अच्छा profit मिल जाता है।
- No Overnight Risk: मार्केट बंद होने के बाद कोई global event (जैसे US Fed announcement) आपकी position को affect नहीं कर सकता।
- Leverage का फायदा: Broker आपको borrowed money देता है, जिससे कम capital से बड़ा trade संभव होता है।
- Capital Rotation Fast: पैसे बार-बार घूमते रहते हैं, compounding effect मिलता है।
- Tax Benefit: Short-term capital gains पर 15% flat tax (delivery के 20% slab rate से कम)।
Intraday Trading के नुकसान (Disadvantages / Risks)
- High Risk Nature: 80% intraday traders पहले साल में loss करते हैं।Emotional Pressure: हर मिनट market देखना stress बढ़ाता है।
- Losses तेजी से हो सकते हैं: Leverage की वजह से छोटा loss भी capital को wipe out कर सकता है।
- Beginners के लिए Dangerous: बिना knowledge के gambling जैसा हो जाता है।
- Brokerage Charges: हर trade पर brokerage + STT लगता है, जो profit खा जाता है।
सच्चाई: Intraday trading gambling नहीं है अगर सही strategy हो, लेकिन discipline के बिना यह 99% लोग lose करते हैं।
इंट्राडे ट्रेडिंग में सही शेयर कैसे चुनें?
High Volume Stocks
- Daily volume > 10 लाख
- sharesExamples: Reliance, HDFC Bank, Infosys, Tata Motors
Volatility का महत्व
- ATR (Average True Range) > 2-3%
- Volatile stocks = ज्यादा profit opportunity
News Based Stocks
- Earnings announcement, merger news
- Gap Up/Down Stocks: Opening में 3-5% gap वाले stocks
Screening Method:
- NSE Top Gainers/Losers देखें
- Volume screener use करें
- Pre-market news check करें
Best Time for Intraday Trading in India
Market Opening Volatility (9:15–9:45)
- सबसे अच्छा समय! Global cues + institutional orders।
- Risk: very high (false breakouts)
Mid-day Low Activity (11:00–2:00)
- Range-bound market।
- Scalping के लिए ठीक।
Closing Hour (2:30–3:30)
- Institutions square-off करते हैं।
- Big moves possible
Beginners के लिए Best Time: 9:30–11:00 AM (volatility control में)।
इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए जरूरी नियम (Golden Rules)
Stop Loss क्यों जरूरी है?
Stop Loss वो price level है जहां आपका trade automatically बंद हो जाता है।
Example: ₹100 पर buy किया, ₹98 पर stop loss लगाया। अगर price गिरकर ₹98 पहुँच जाए तो trade बंद। बिना stop loss के छोटा loss बड़ा हो जाता है।
Risk–Reward Ratio क्या होना चाहिए?
हमेशा 1:2 या 1:3 ratio रखें। यानी ₹1 risk के बदले ₹2-3 profit target।
Formula:
Risk = Entry Price – Stop Loss Price
Reward = Target Price – Entry Price

एक दिन में कितने trades करें?
- Beginners: 2-3 trades maximum
- Experienced: 5-7 trades
Quality over quantity — जब setup perfect हो तभी trade लें।
Discipline और Patience का महत्व
Market हमेशा opportunity नहीं देता। 70% समय wait करें, 30% समय trade करें।
इंट्राडे ट्रेडिंग में कौन-से Indicators सबसे अच्छे हैं?
1. Moving Average (MA)
- SMA (20, 50 periods) crossover से trend direction पता चलता है।
- Golden Cross (50MA > 20MA) = Buy signal
2. RSI (Relative Strength
Index)
- 30 के नीचे = Oversold (Buy)
-
70 के ऊपर = Overbought (Sell)
- Intraday के लिए 14-period RSI best है।
3. MACD (Moving Average Convergence Divergence)
Signal line crossover और histogram से momentum पता चलता है।
4. VWAP (Volume Weighted Average Price)
- सबसे important intraday indicator!
-
Price > VWAP = Bullish
-
Price < VWAP = Bearish
5. Bollinger Bands
- Middle band (20MA) + upper/lower bands।
- Price upper band को छूए = Sell, lower band = Buy।

इंट्राडे ट्रेडिंग Strategies (Beginner to Advanced)
1. Breakout Strategy (Beginner)
- Resistance level break होने पर buy।
- Setup: Volume + breakout
- candle। Stop loss resistance के नीचे।
2. Pullback Strategy
Uptrend में price थोड़ा गिरे तो buy। Moving average पर bounce।
3. Trend Following Strategy
20MA के ऊपर ही long trades। Downtrend में short।
4. Scalping Strategy (Advanced)
1-2 मिनट के charts पर 0.5-1% moves catch करना। High volume stocks में।
5. VWAP based Strategy
- Price VWAP को cross करे upward → Buy
-
Downward cross → Sell
Pro Tip: हमेशा 2-3 indicators का confluence ढूंढें।
इंट्राडे ट्रेडिंग में Stop Loss और Target कैसे लगाएं?
Fixed vs Technical Stop Loss
| प्रकार | Fixed SL | Technical SL |
|---|---|---|
| Method | Entry से 1–2% नीचे | Recent swing low / support |
| उदाहरण | ₹100 buy → ₹98 SL | VWAP के नीचे SL |
| फायदा | Simple | Accurate |
Trailing Stop Loss
Profit होने पर SL को ऊपर shift करें
Example: ₹100 → ₹105 profit → SL को ₹102 कर दें।
Risk Management Example
Capital: ₹2 लाख
Per trade risk: 1% = ₹2,000
Entry: ₹500, SL: ₹490 (₹10 risk/share)
Max quantity: 200 shares
इंट्राडे ट्रेडिंग में होने वाली Common Mistakes
- बिना Plan Trade करना — हर trade पहले paper पर लिखें।
-
Overconfidence — 2 profit trades के बाद big loss।
-
Revenge Trading — Loss recover करने के चक्कर में और loss।
-
Ignoring Stop Loss — “थोड़ा और wait कर लेते हैं” mentality।
Avoid करने के Tips:
- Trading Journal maintain करें
-
Daily review करें
-
Emotions को control करें
इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए Best Apps & Platforms (India 2026)
Free में Treding सीखने के लिए Best Apps & Platforms की list यहां दी गई है, जिसमें से किसी भी platform का use करके आप Advanced level तक पहुंच सकते हैं।
| Platform | Brokerage | Features | Rating |
|---|---|---|---|
| Zerodha Kite | ₹20 / order | Charts, Options chain, Fast | ⭐⭐⭐⭐⭐ |
| Upstox Pro | ₹20 / order | Advanced charts, Algo | ⭐⭐⭐⭐ |
| Angel One | ₹20 / order | Free research, Margin | ⭐⭐⭐⭐ |
| Groww | ₹20 / order | Simple UI, Beginners | ⭐⭐⭐ |
Recommendation:
- Beginners → Groww/Zerodha,
- Pro → Upstox।
इंट्राडे ट्रेडिंग सीखने में कितना समय लगता है?
| Phase | Duration | Focus |
|---|---|---|
| Learning Phase | 3–6 months | Theory, indicators, paper trading |
| Practice Phase | 6–12 months | Demo account, small real trades |
| Consistent Profit | 1–2 years | Live trading with discipline |
Reality Check: 90% beginners पहले 6 महीने में quit कर देते हैं। Patience रखें।
इंट्राडे ट्रेडिंग से रोज पैसा कमाया जा सकता है?
Myth vs Reality
| Myth | Reality |
|---|---|
| रोज़ 10% return | Monthly 5–10% realistic |
| Guaranteed profit | 60% win rate भी अच्छा माना जाता है |
Professional Traders की सोच:
Weekly target सेट करें।
Monthly 8-12% return भी excellent है।
इंट्राडे ट्रेडिंग Beginners के लिए सही है या नहीं?
कौन करें:
✅ Full-time available
✅ Analytical mind
✅ Risk tolerance high
✅ Discipline रख सकते हैं
कौन Avoid करें:
❌ Job holders (time नहीं)
❌ Gambling tendency
❌ Emotional decisions
Alternatives: Swing trading, Mutual Funds, SIP।
इंट्राडे ट्रेडिंग से जुड़े Tax और Charges (India 2026) Income Tax Rules
Business Income माना जाता है (slab rate 5-30%)
Turnover > ₹2 करोड़ → Audit जरूरी
Other ChargesSTT: 0.025% sell side
Brokerage: ₹20/order
GST: 18% on brokerage
Net Profit Example
Gross Profit: ₹50,000Charges: ₹2,500Tax (20% slab): ₹9,500Net Profit: ₹38,000
Conclusion
इंट्राडे ट्रेडिंग शेयर बाजार का सबसे रोमांचक लेकिन risky तरीका है। यह उन traders के लिए है जो market psychology, technical analysis और iron discipline रखते हैं। हमने देखा कि intraday में leverage, quick profits के फायदे हैं, लेकिन high risk, emotional pressure भी।
सबसे महत्वपूर्ण: Risk management > Profit target। हमेशा stop loss लगाएं, 1:2 risk-reward रखें, और quality trades ही करें। Beginners को paper trading से शुरू करना चाहिए।
Final Advice for Beginners:
- ₹1-2 लाख capital से start करें
- Zerodha/Groww जैसे trusted
- platform use करें
- 6 महीने demo practice करें
- Daily journal लिखें
Remember: Consistent profitability overnight नहीं आती। Long-term learning mindset रखें। Intraday trading skill है, luck नहीं। सही approach से आप भी successful intraday trader बन सकते हैं!
